Sunday, April 11, 2021
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एक शायरा —- एक ग़ज़ल

एक भी शख्स वफ़ादार कहाँ मिलता है
मेरी चाहत का तलबगार कहाँ मिलता है

यूं हसीं आप सा कोई भी ज़माने में नहीं
फिर भी दिल का कोई बीमार कहाँ मिलता है

देखो वीरान है गुलशन की भी दुनिया लोगो
फूल तो फूल है अब खार कहाँ मिलता है

घर से बाहर तो मज़ा आता है जानां लेकिन
गाँव का अपना वो घर बार कहाँ मिलता है

कल था जो पेड़ समरदार ” निगार ” अब देखो
आज वो पेड़ समरदार कहाँ मिलता है

निगार आरा

आसंसोल , बंगाल , भारत