Sunday, April 11, 2021
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एक शायर — एक ग़ज़ल

अता आबदी उर्दू शायरी का एक ऐसा परिचित नाम है , जिनकी कई पुस्तकें छप चुकी हैं और जिन्हें आलोचकों व पाठकों ने पसंद किया है । राष्ट्रीय स्तर के कई सम्मान से आप को सम्मानित किया जा चुका है । अता आबदी की एक ग़ज़ल ” तेवर न्यूज़ ” पर पेश की जा रही है ।

सच्चाई महदूद रहे क्यों क़िस्सों तक
आ पहुंचा दें क़िस्सा अपना अपनों तक

आंखें अपनी आईना हैं पर अफ़सोस
उलझा उलझा अक्स है उसका चेहरों तक

पानी पानी अपने होंठ तरस्ते हैं
घर में पानी दर आया है टखनों तक

आंखों में है ताज महल का ख्वाब मगर
दिल रहता है उलझ घर के नक्शों तक

हम भी राही राहे उल्फ़त के टहरे
फूल बनें हैं कांटे आकर तलवों तक

अच्छे दिन की आस में हम हर रोज़ ” अता “
ले जाते हैं ख्वाब खिलौने बच्चों तक

    ( अता आबदी ) 
     पटना , भारत