Wednesday, August 5, 2020
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प्राईवेट स्कूल में फीस की मनमानी और अभिभावक की परेशानी

मिर्जा़ ज़की अहमद बेग

आज कल प्राइवेट स्कूल के खिलाफ कार्रवाई की माँग काफी बढ़ गई है, कुच्छ लोग धरने पर बैठे हुए हैं तो कुछ प्रेस बयान दे रहे हैं, इस में सामाजिक चिंता भी है और सियासत भी है. चुनावी मौसम आ रहा है, इस लिए इस बहाने जनता के बीच अपनी मौजूदगी लोग दर्ज करा रहे हैं. कुछ अभिभावक का कहना है कि जब पढ़ाई नहीं तो फीस क्यूँ, उनकी बात को नकारा नहीं जा सकता है लेकिन प्रश्न य़ह भी है कि स्कूल पूरे साल का कार्यक्रम बनाते हैं. शिक्षकों की नियुक्ति पूरे साल के लिए होती है, स्कूल में टूट फुट और दूसरे खर्च अलग हैं. अब अगर स्कूल वाले फीस नहीं लेंगे तो शिक्षकों की तनख्वाहें और दूसरे ख़र्चे कैसे पूरे करेंगे.

स्कूल सिर्फ स्कूल मैनेजमेंट से नहीं चलता, अभिभावकों का साथ भी चाहिए. अगर इतनी ही तकलीफ़ है तो अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूल में पढ़ने क्यूँ भेजा, सरकारी स्कूल में दाखिला लिया होता. इतनी ही चिंता है तो सरकारी स्कूल की दशा और दिशा ठीक करें और वहाँ अपने बच्चों को भेजें. हाँ कुछ स्कूल ऐसे हैं जो फीस में मन मानी करते हैं उस पर बात की जाए. इसके लिए स्कूल के मैनेजमेंट से बात की जा सकती है, अथवा अभिभावक संघ होता है जिसे पी टी ए भी कहते हैं. अगर स्कूल की कुछ शिकायत है तो बात करें नहीं माने तो सरकारी शिक्षा विभाग है. बहुत से स्कूल ने लॉक डाउन में भी क्लास जारी रखा और ऑन लाइन की सुविधाएं उपलब्ध कराया और बच्चों को उन के घरों पर शिक्षा दी. स्कूल के बारे में दोनों पक्षों के हित को ध्यान में रखते हुए ही कुछ कदम उठाए जाएं. विरोध करने से पहले दोनों पक्षों का अध्ययन करें फिर जो उचित हो करें.

( अध्यक्ष, तामीर ए मिल्लत फाउंडेशन )

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