Friday, July 3, 2020
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बनारस के मशहूर शायर ” कबीर अजमल ” नहीं रहे

बनारस के मशहूर शायर कबीर अजमल का 29 जून को मात्र 53 वर्ष की आयू में बनारस के अस्पताल में देहांत हो गया. उनकी मृत्यु की सूचना जैसे ही मिली, मैं ने उनके दोस्त और बनारस के चर्चित शायर खालिद जमाल व बंगलूर में रह रहे मशहूर शायर ग़ुफ़रान अमजद से फ़ोन पर बात करके सूचना की पुष्टि की और कबीर अजमल के संदर्भ में बहुत कुछ मालूम किया. कबीर अजमल एक कुशल कारोबारी थे और बनारस में साहित्यिक मंच सजाने में हमेशा आगे रहते थे, जब भी कोई शायर बनारस गया, कबीर अजमल का प्रशंसक हो गया, उनकी शख्सियत ऐसी थी कि जो कभी उन से मिला उनका दोस्त हो गया.

दिल्ली के ग़ालिब अकादमी में कबीर अजमल के कविता संग्रह के विमोचन और आल इंडिया मुशायरे की तस्वीर

बंगलूर में रहने वाले ग़ुफ़रान अमजद जो मेरे भी दोस्त हैं, उनके कहने पर मैं ने कबीर अजमल के कविता संग्रह ” मुंतशिर लम्हों का नूर ” के विमोचन का दिल्ली के ग़ालिब अकादमी में आयोजन किया. इस अवसर पर एक बडे़ आॅल इंडिया मुशायरे का आयोजन भी किया गया था जिस में बंगलूर से ग़ुफ़रान अमजद और बनारस से कबीर अजमल विशेष रूप से शामिल हुए थे. इस मुशायरे में बिहार, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और दिल्ली के प्रतिष्ठित शायरों ने इसे ऐतिहासिक बना दिया. आज उनकी मृत्यु पर उनसे मुलाक़ात और बहुत सी बातें याद आ रही हैं. लेकिन लिखना मुश्किल हो रहा है. अल्लाह सर्वशक्तिमान उन्हें स्वर्ग में स्थान दे.

बंगलूर में ग़ुफ़रान अमजद, कबीर अजमल का सम्मान करते हुए

खा़लिद जमाल और कबीर अजमल साहित्यिक समारोह में

उनके कुछ शेर जो उन्हें हमेशा जिंदा रखेंगे.

चराग़े दर्द हवाओं से बुझने वाला नहीं

मगर वो रुत है कि अबके हमें संभाला नहीं

वो मौज ए हवा जो अभी बहने की नहीं है

हम जानते हैं आप से कहने की नहीं है

चले चलो युँही जब तक सफ़र कुशादा है

ज़मीं कहीं न कहीं आसमान होती है

जिस को मेयार ए सितम कहती थी कल तक दुनिया

आज के दौर की तहज़ीब कही जाती है

सियाह रात उतरने लगी है पलकों पर
तुझे मैं लज़्ज़त ए यक ख़्वाब और क्या दूँगा

( डॉ. बिस्मिल आरिफ़ी )

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