Sunday, April 11, 2021
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लालू की पलटी, नीतीश का पलटवार

बिहार विधान सभा  चुनाव 2015 में नीतीश कुमार ने राजद से हाथ मिलाकर  एक तरह से मृतप्राय पार्टी राजद  को अभयदान दे दिया था l  लालू के समर्थन  से नीतीश कुमार की अगुआई  में सरकार भले ही बन गयी थी लेकिन लालू नीतीश सरकार को गिराकर अपना सरकार बनाने की जुगत में  दिन रात  जुट गए थे. वे दिन -रात  कांग्रेस  और शरद यादव को  मनाने में लगे हुए थे. लालू को यह लग रहा था कि अगर कांग्रेस अपना 27 विधायकों वाला  समर्थन दे दे और शरद यादव अपने प्रभाव वाले 10-12 JDU विधायकों की जुगत बिठा दें तो नीतीश कुमार जी को गद्दी से हटाकर अपने युवराज को मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है. शरद यादव ने अली अनवर को भरोसे में लेकर  इसके लिए हामी भर दी थी  और जदयू को तोड़ने में अपनी ऊर्जा खपाने लगे थे. कांग्रेस  ने भी लालू की मनमाफिक डीलिंग कर सरकार गिराने को तैयार हो गयी थी. तब स्थानीय बीजेपी भी राजद को ऐसा करने के लिए उकसा रहा है

लालू अपने खेल को अंजाम तब दे सकते थे जब विधानसभा अध्यक्ष  तथा राज्यपाल  का साथ मिलतामिलता. विधानसभा  अध्यक्ष से सहयोग की कोई उम्मीद नहीं थी. सो उन्होंने अपने पार्टी के एक वरीय नेता संभवतः  जयप्रकाश नारायण यादव जी को अरुण जेटली जी के पास भेजा और राज्यपाल को अपने फेवर में भूमिका निभाने का आश्वासन माँगा. तब अरुण  जेटली साहब ने सीधा -सीधा  कोई आश्वासन  तो नहीं दिया  लेकिन नीतीश के खिलाफ साजिश रचने  की कहानी का भंडाफोड़  जरूर हो गया.

लालू का पुत्र-मोह  जदयू राजद  गठबंधन के लिए घातक साबित हुआ. आखिर  जदयू कब तक  पलटी मारने की ताक  में  बैठे ,  पुत्र-मोह  में आकंठ डूबे  लालू के साथ राजनीतिक हमसफ़र बनती. अतः  नीतीश ने पलटवार किया तो लालू , शरद यादव ,अली अनवर सरीखे नेताओं का षड्यंत्र फेल हो गया.

नीतीश अपने पुराने सहयोगी भाजपा के साथ वहीं के वहीं रहे  यानि मुख्यमंत्री  बने रहे. लालू छब्बे  बनने की चाहत में कहीं  के नहीं रहे. अब्दुलबारी सिद्द्की, रघुबंश प्रसाद सिंह, रामचंद्र  पूर्वे, अलोक मेहता जैसे नेता जानते हैं कि लालू को नीतीश कुमार के साथ जो सम्मानजनक व्यवहार करना चाहिए था वह नहीं किया. जो वफादारी निभानी चाहिए थी वो नहीं निभाया. इनमें से कोई न कोई नेता आगामी विधानसभा  चुनाव में लालू, शरद  की धोखाधड़ी  की पोल जरूर  खोलेंगे.

रिंकु कुमारी     
                     

             ( लेखक दिल्ली विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफेसर हैं )