Sunday, April 11, 2021
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सामाजिक कार्यकर्ता और साहित्य प्रेमी थे मंज़र आलम ।

मंज़र आलम
( तस्वीर में अख़बार पढ़ते हुए )

मंज़र आलम अब इस दुनिया में नहीं रहे, पिछले दिनों लम्बी बीमारी के बाद उनका निधन हो गया, वो रतनपुरा, दरभंगा, बिहार के रहने वाले थे और दिल्ली के हौज़रानी में रहते थे। पिछले कुछ वर्षों से वो बिहार में शिफ़्ट हो गए थे, जहाँ लम्बी बीमारी के बाद उनका निधन हो गया। उनकी पत्नी और दो बेटे मोदस्सर आलम व मोबश्शर आलम हैं। आज जब वो इस दुनिया में नहीं हैं तो उनके अच्छे काम याद आ रहे हैं, वो समाज से जुड़े सभी मामले में दिलचस्पी लेते थे, साहित्य से भी उन्हें बड़ा लगाव था।

वो मशहूर शायर क़ैसर सिद्दीक़ी और शायर व पत्रकार डा.बिस्मिल आरिफ़ी से खा़स मुहब्बत से पेश आते थे। मैं जब भी कोई सामाजिक या साहित्यिक प्रोग्राम रखता था, मंज़र आलम उस प्रोग्राम में इस प्रकार शामिल होते थे, जैसे वो प्रोग्राम उनका हो, वो किसी बात पर नाराज़ हो जाते तो दो चार दिन नहीं मिलते लेकिन जैसे ही सामना होता और में बढ़ कर मिलता, सभी शिकायत समाप्त हो जाती और फिर से सब ठीक हो जाता। उनके निधन से हम सब ने एक उतसाहित सामाजिक कार्यकर्ता और साहित्य प्रेमी को खो दिया है। उनके निधन के बाद मै ने उनके बेटे मोदस्सर आलम और उनके भांजा इमरान हुसैन रिज़वी से बात की और उनसे बहुत सी बातें मालूम कीं। मैं ने दरभंगा स्थित अपने मदरसे ” क़ौमी निसवां ” में मरहूम के लिए खुसूसी दुआ कराई। बहुत जिंदादिल इंसान थे, अल्लाह उनकी मग़्फि़रत करे, आमीन।

मिर्ज़ा ज़की बेग
अध्यक्ष, तामीर ए मिल्लत फाउंडेशन