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बिहार पुलिस हिटलर की सेना गेस्टापो में तबदील हो चुकी है ।

राजद के प्रदेश प्रवक्ता-सह -विधायक अख्तरुल इस्लाम शाहीन ने पटना में दिनांक -10.11.18 को कुशवाहा समाज के "आक्रोंश मार्च" पर पुलिस के लाठीचार्ज को लेकर नीतीश सरकार पर निशाना साधा है तथा बर्बर लाठी चार्ज की तीव्र निंदा की है। उन्होंने कहा कि पटना में शांतिपूर्वक आन्दोलन कर

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बिहार के कांग्रेस नेता अब्दुल जलील मस्तान नहीं रहे , तस्लीमुद्दीन के बाद सीमांचल को बड़ा आघात ।

अब्दुल जलील मस्तान अपने अनोखे अंदाज़ और बोलने की अलग शैली के लिए जानें जाते रहे हैं , कभी कभी वो अपने विवादित बयानों के कारण चर्चा में भी रहे हैं । वो सीमांचल के आमौर और कदवा से कई बार विधायक रहे , उन्होंने अपनी राजनीतिक जीवन की शुरुआत

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एक शायर — एक ग़ज़ल

हूर हो या परी नहीं चलेगी कह दिया ना कोई नहीं चलेगी तु मुझे चाहिये मुझे बस तू दूसरी तीसरी नहीं चलेगी अब तो सहरा भी टोकने लगा है इतनी वहशत तिरी नहीं चलेगी तुम चले जाओगे , चले जाओ क्या मिरी ज़िंदगी नहीं चलेगी यार तलवार चल रही है

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मोगल सम्राट बहादुर शाह ज़फर की याद में गोष्टी का आयोजन ।

दिल्ली के ग़ालिब एकेडमी में मोग़ल सम्राट बहादुर शाह ज़फर की याद में एक गोष्टी का आयोजन किया गया , जिस में उनके देश प्रेम और बलिदान को याद किया गया । इस अवसर पर विभिन्न कार्य क्षेत्रों से जुड़े महजबीं उमर , ज़फर अनवर , राजा राव चंद्रसेन

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नोटबंदी की बरसी पर विरोध प्रदर्शन ।

समस्तीपुर प्रखंड के केवस निजामत स्थित पंचायत राजद कार्यालय से "प्रतिरोध मार्च " निकाला गया जो बिभिन्न मार्ग होते हुए मोरदीवा हॉस्पिटल चौक के पास पहुंच कर "प्रतिरोध -सभा " में तब्दील हों गया । अध्यक्षता राजद प्रखंड अध्यक्ष उमेश प्रसाद यादव और संचालन राजद

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क्या राम विलास पासवान डर गये हैं ?

राम विलास पासवान जमीनी नेता माने जाते रहे हैं और उन्होंने एक समय में सब से अधिक मतों से जीतने का रिकार्ड भी बनाया था लेकिन समय के साथ उनकी पकड़ कमज़ोर हुईं और उनकी जीत का अंतराल लगातर कम होता गया । अब हाल ये है कि वो चुनाव

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एक शायरा — एक ग़ज़ल

वो चाँद लगा मुझ को सितारा वो लगा था इक दोस्त बहुत प्यारा था प्यारा वो लगा था जब उस ने बचाया मुझे , मैं डूब रही थी बिफरी हुईं मौजों में किनारा वो लगा था कुछ अश्क मिरे उस को रुलाते रहे हरदम कुछ अपने मुक़द्दर का भी मारा

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एक शायरा — एक ग़ज़ल

जब जब दिल ये पागल रोए देख के मंज़र बादल रोए नैन मिला कर तुझ से साजन हर दिन मेरा काजल रोए पंघट पर जब उसको देखा गागर रोई छागल रोए जिस पे लिखी है माँ की कहानी उस ममता का आँचल रोए जब से पड़ी है पांव में बेड़ी

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