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मुम्बई में साहित्यिक महफ़िल का आयोजन ।

दिल्ली, फरीदाबाद और हरियाणा के बाद 'कारवान-ए-सुख़न' का मुंबई में भी आधिकारिक आयोजन । प्रोगाम से पूर्व कुछ साहित्यिक चर्चा के साथ इसके संघठन संरचना और कार्यकारिणी सदस्यों पर भी कुछ तत्कालीन निर्णय लिए गए । रिवायती शायरी को साफ़ और ईमानदार मंच देने के लिए इस

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समस्तीपुर में मुशायरा का आयोजन ।

उर्दू शायरी के शौक़ में बहुत से ऐसे लोगों को मैं ने उर्दू भाषा सीखते देखा है जिन की मातृ भाषा हिंदी , मराठी , बंगला और दक्षिण भारत की भाषायें हैं और जिन की मातृ भाषा उर्दू है , वो सरकारी अनुदान के सहारे बैठे हैं । हम

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बिहार एन डी ए में तकरार मगर कुशवाहा का मंत्री मोह बरक़रार ?

बिहार में अभी भी गठबंधन की इस्थिति स्पष्ट नहीं है और इस घाल मेल में एन डी ए भी है और उस के विपरीत बनने वाला गठबंधन भी , दोनों के घटक दल सयंम को प्रमाणित करते रहते हैं और इस में कभी कभी बात बिगड़ भी जाती

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एक शायरा — एक ग़ज़ल

इश्क़ करते रहे इज़हार की हिम्मत नहीं की हम भी ख़ामोश रहे , उस ने भी ज़हमत नहीं की पैरवी ग़म की तिरे की है हमेशा दिल ने एक लम्हा को भी गफ़लत की जसारत नहीं की दश्त व सहरा में चले आये जुनूं के हमराह हम ने उस से

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एक शायर — एक ग़ज़ल

बन्द है जो ज़ुबान खोलूँ क्या सुन सकोगे मुझे मैं बोलूँ क्या तेज़ बारिश है और मौक़ा भी मैं तुझे साथ में भिगो लूँ क्या तेरी मंज़िल ही मेरी मंज़िल है मैं तेरे साथ साथ हो लूँ क्या मर चुका है जो मुझमें ज़िन्दा था नब्ज़ उसकी मैं अब टटोलूँ क्या मैं तुम्हारा हूँ बस तुम्हारा हूँ तो किसी

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बिहार पुलिस हिटलर की सेना गेस्टापो में तबदील हो चुकी है ।

राजद के प्रदेश प्रवक्ता-सह -विधायक अख्तरुल इस्लाम शाहीन ने पटना में दिनांक -10.11.18 को कुशवाहा समाज के "आक्रोंश मार्च" पर पुलिस के लाठीचार्ज को लेकर नीतीश सरकार पर निशाना साधा है तथा बर्बर लाठी चार्ज की तीव्र निंदा की है। उन्होंने कहा कि पटना में शांतिपूर्वक आन्दोलन कर

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बिहार के कांग्रेस नेता अब्दुल जलील मस्तान नहीं रहे , तस्लीमुद्दीन के बाद सीमांचल को बड़ा आघात ।

अब्दुल जलील मस्तान अपने अनोखे अंदाज़ और बोलने की अलग शैली के लिए जानें जाते रहे हैं , कभी कभी वो अपने विवादित बयानों के कारण चर्चा में भी रहे हैं । वो सीमांचल के आमौर और कदवा से कई बार विधायक रहे , उन्होंने अपनी राजनीतिक जीवन की शुरुआत

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एक शायर — एक ग़ज़ल

हूर हो या परी नहीं चलेगी कह दिया ना कोई नहीं चलेगी तु मुझे चाहिये मुझे बस तू दूसरी तीसरी नहीं चलेगी अब तो सहरा भी टोकने लगा है इतनी वहशत तिरी नहीं चलेगी तुम चले जाओगे , चले जाओ क्या मिरी ज़िंदगी नहीं चलेगी यार तलवार चल रही है

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मोगल सम्राट बहादुर शाह ज़फर की याद में गोष्टी का आयोजन ।

दिल्ली के ग़ालिब एकेडमी में मोग़ल सम्राट बहादुर शाह ज़फर की याद में एक गोष्टी का आयोजन किया गया , जिस में उनके देश प्रेम और बलिदान को याद किया गया । इस अवसर पर विभिन्न कार्य क्षेत्रों से जुड़े महजबीं उमर , ज़फर अनवर , राजा राव चंद्रसेन

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नोटबंदी की बरसी पर विरोध प्रदर्शन ।

समस्तीपुर प्रखंड के केवस निजामत स्थित पंचायत राजद कार्यालय से "प्रतिरोध मार्च " निकाला गया जो बिभिन्न मार्ग होते हुए मोरदीवा हॉस्पिटल चौक के पास पहुंच कर "प्रतिरोध -सभा " में तब्दील हों गया । अध्यक्षता राजद प्रखंड अध्यक्ष उमेश प्रसाद यादव और संचालन राजद

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