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भारत के छात्र अपने पूर्वजों के नक्शेक़दम पर चल रहे हैं।

डॉ. मोहम्मद मंज़ूर आलम बलिदान, संघर्ष, ईमानदारी, उत्साह और दृढ़ संकल्प के बाद ही कोई आंदोलन सफल हो है। लंबे संघर्ष, योजनाओं और लंबी लड़ाई के बाद एक क्रांति आती है। एक बदलाव होने वाला है, लेकिन इसके लिए एक लंबे संघर्ष, बलिदान और योजना की आवश्यकता है। हाल के

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राजनीति की आपको समझ नहीं, इसका यह मतलब नहीं कि राजनीति ग़लत है!

शाहनवाज़ भारतीय जब राजनीति सब तय करने लगी है तो मुसलमानों को भी अपनी राजनीति तय कर लेनी चाहिए। याद रहे, जिस समाज ने सियासत छोड़ी है, इस सियासत ने उस समाज को कहीं का नहीं छोड़ा है। वर्तमान परिदृश्य में, मुसलमानों में एकता तथा नेतृत्व विकसित करने का सबसे

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सामाजिक ताना बाना टूटने न दें ।

हम अगर अपनी विचारधारा लोगों तक नहीं पहुंचा पा रहें हैं तो ग़लती लोगों की नहीं, हमारी ही है। सबसे पहले हमें ही सुधरना होगा, और अपने किरदार से अपनी बातें लोगों तक पहुँचानी होगी! जो सामाजिक व्यवस्था आप चाहते हैं पहले उसका मॉडल दिखाना होगा, मॉडल चाहे

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सोनी सोरी को दी गई यतानाओं की चर्चा क्यूं नहीं ।

इस देश का समाजिक ताना बाना किस तरह का बुना गया है इसकी एक बानगी देखनी हो तो आप 17 अप्रैल 2019 के बाद भारत के इस खाये पिए अघाये सवर्ण और " भारत माता की जय ब्राडं" देशभक्ति का नमूना देखिये । ये तब्क़ा अब मानवाधिकार की दुहाई दे

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rashtravad ke siddhant

राष्ट्रवाद की सैद्धांतिक अवधारणा ।

राष्ट्रवाद एक ऐसी अवधारणा है जिस पर वाद-प्रतिवाद तो काफी हो चुके हैं परंतु अभी तक संवाद स्थापित नहीं हो पाया है। इसकी जटिलता का प्रमुख कारण इसकी बहुआयामी प्रवृत्ति है , राष्ट्रवाद को विश्व भर के कई विद्वानों द्वारा परिभाषित किया गया है, लेकिन उनके वैचारिक अवधारणा के संदर्भ

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भाजपा ने पिछले पांच वर्षों में केवल संप्रदायिकता को बढ़ाया ।

लोकसभा चुनाव की रणभेरी बज चुकी है और हर चुनावी योद्धा और रणनीतिकार दिन-रात सभी मोर्चे की किलेबंदी और विरोधी के गढ़ में सेंधमारी करने से ले कर मतदाताओं को रिझाने में जुटा है। सभी राजनितिक दल अपने अपने जीत के दावे कर रहे हैं। लेकिन सम्प्रदायिक राजनीती के लिए

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बेगूसराय में वामदल कितना मजबूत ?

हम सब यह जानते हैं कि आगामी लोकसभा चुनाव 2019 का बिगुल फूंका जा चुका है, जिसके लिए हर दल ने अलग-अलग सीटों पर अपनी दाबेदरी पेश करना शुरू कर दिया है! इसी क्रम में बेगूसराय से लोकसभा प्रत्याशी के लिए CPI ने अपनी दाबेदभारतीहै । या कुमार के नाम

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चुनावी बजट कितना विफल ।

भाजपा के नेतृत्व वाली एन डी ए सरकार ने अन्त्रिम बजट 2019 पेश कर दिया है कहने को तो यह अन्त्रिम बजट है लेकिन इसकी पूरी कोशिश की गई है कि यह पुर्ण कालिक बजट जैसी हो । भाजपा इसे जनता के हित में और फ़ायदा पहुंचाने वाला बता रही

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विश्व पुस्तक मेला में क्या रहा खास ।

पुस्तकें पढ़ने लिखने वालो का सच्चा साथी होती हैं , ये सृजन शीलता को विकसित करती हैं , इनमें व्यक्तित्व को निखारने की अद्भुत क्षमता होती है । इस संबंध में विश्व पुस्तक मेले को देखा जाए तो यह दिल्ली वालो के जीवन में अद्वितीय योगदान करती हैं और अतुल्य

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जमीअतुल उलेमा ए हिन्द के सौ साल ।

100 साल पहले जब जमीअतुल उलेमा ए हिन्द का गठन किया गया तो देश की स्वतंत्रता इसका लक्ष्य था दूसरा बड़ा लक्ष्य खिलाफ़त को क़ायम करने के लिए आंदोलन करना था । अब जब इसका शताब्दी वर्ष पूरा हुआ हैं तो यह मुस्लिम समुदाय के अधिकार के लिए आवाज़ बन

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